सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल: झारखंड हाई कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल, गोपनीयता को दी गई चुनौती
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सूचना आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल: झारखंड हाई कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका दाखिल, गोपनीयता को दी गई चुनौती

Questions Raised Over Appointment of Information Commissioners

Questions Raised Over Appointment of Information Commissioners

रांची। Questions Raised Over Appointment of Information Commissioners, झारखंड हाई कोर्ट में सूचना आयुक्तों की नियुक्ति की प्रक्रिया में बरती जा रही गोपनीयता को चुनौती देते हुए एक हस्तक्षेप याचिका दाखिल की गई है।

अधिवक्ता विशाल कुमार की ओर से दाखिल याचिका में चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और अनुशंसित उम्मीदवारों के चयन के आधार को सार्वजनिक करने की मांग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि इससे संबंधित जनहित याचिका में सरकार को फटकार के बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता वाली चयन समिति ने 25 मार्च बैठक कर कुछ नामों की अनुशंसा तो की, लेकिन आवेदकों की सूची, शार्टलिस्ट किए गए उम्मीदवारों के नाम और चयन के आधार को सार्वजनिक नहीं किया।

याचिकाकर्ता का कहना है कि यह सुप्रीम कोर्ट के अंजली भारद्वाज बनाम भारत सरकार के मामले में दिए गए स्पष्ट निर्देशों का उल्लंघन है, जिसमें चयन प्रक्रिया को पूर्णतः पारदर्शी बनाने और विवरण वेबसाइट पर अपलोड करने का आदेश दिया गया था।

सूचना आयुक्तों का राजनीति से जुड़ाव न हो

याचिका में आरटीआइ अधिनियम का हवाला देते हुए यह भी कहा गया है कि सूचना आयुक्त का किसी राजनीतिक दल से जुड़ा नहीं होना चाहिए। पारदर्शिता के अभाव में यह जांचना असंभव है कि अनुशंसित उम्मीदवार इस वैधानिक अयोग्यता के दायरे में तो नहीं आते।

याचिका चयन समिति की कार्यवाही और आवेदकों का विवरण तुरंत सार्वजनिक करने, 25 मार्च को की गई अनुशंसाओं के आधार पर तब तक कोई नियुक्ति नहीं की जाए, जब तक प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं हो जाए। पारदर्शिता के बिना की गई चयन प्रक्रिया को अवैध घोषित किया जाए।

अधिवक्ता विशाल कुमार ने कहा कि जो संस्था स्वयं पारदर्शिता की संरक्षक है, उसकी नियुक्ति प्रक्रिया ही अपारदर्शी नहीं हो सकती। यदि राज्य की नियुक्तियां ऐसे की जाएंगी तो सूचना के अधिकार का मूल उद्देश्य ही समाप्त हो जाएगा।